मंगलवार, 20 सितंबर 2016

बिहार शिक्षा विभाग के महत्व पूर्ण दूरभाष, ईमेल

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Sl# Name of Office /Directorate Office Address Office Contact Number Email -Address
1 Principal Secretary ,Education Department Ground Floor ,New Secretariat, Vikash Bhawan Patna 800015 0612-2217016 secy-edn-bih@nic.in
2 Additional Secretary Education Department 0612-2232338splsecretary.edn@gmail.com
3 Director ,Primary Education 0612-2215869 directorpe.edu@gmail.com
4 Director ,Secondary Education 0612-2215323 directorse.edu@gmail.com
5 Director ,Higher Education 0612-2215792 bih.higheredu@gmail.com
6 Director , Midday Meal Bihar Text Book, 1st Floor, MDM Building, Budh Marg Patna-800001 0612-2231005mdmdirector@gmail.com
7 Director, Administration Ground Floor ,New Secretariat, Vikash Bhawan Patna 800015 0612-2215706
8 Director, Reaserch & Training 3rd Floor ,New Secretariat, Vikash Bhawan Patna 800015 0612-2200367directoratraining@gmail.com
9 Director ,Mass Education 0612-2215413 slmabihar@gmail.com





नियोजित शिक्षक भुखमरी के शिकार

Sitamarhi bihar ke niyojit teachers ko जुलाई 2016 se hi vetan ka payment nahi kiya ja raha hai jis se akser teachro ki halat khasta ho chuki hai qarz ke bojh se ye teacher dab gaye hai inke samne bhookhmari ki naubat aa chuki hai aur sarkar quality education ki bat karti hai sarkar ko sharm karni chahiye
         teachers ko pareshan kar sarkar apna nuqsan par nuqsan karti ja rahi hai magar hose nahi aa rahi hai bihar me agar sabse ziysda reaserch hota hai to wah hai education barbad kar ke rakh diya hai sarkar ne education ko school ke khulne ka time 10.30AM aur band hone ka 4.00PM is se behter time table koi hai hi nahi

कुलथी के औषधीय गुण और उपचार

कुलथी(दलहन) के गुण
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 कुलथी को दक्षिण भारत में काफी ज्यादा खाई जाने वाली दलहन है। दक्षिण भारत में इसके अंकुरित दाने तथा इसके पकवान बनाए जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इसमें अनेको स्वास्थ्य लाभ हैं। कुलथी के दानों में काफी सारा प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम और लौह होता है।

➡ किडनी स्टोन :
कुलथी के सेवन से पथरी टूट कर छोटी होती है, जिससे पथरी सरलता से मूत्राशय में जाकर पेशाब के रास्ते से बाहर आ जाती है।

➡ बुखार और सदी-खांसी :
कुलथी अस्थमा, बुखार, सदी-खांसी या जकड़न से निजात दिलाती है। थोड़ी सी कुलथी को पानी में उबालें, इस पानी से बुखार को नियत्रिंत करने में मदद मिलेगी।

➡ 🐝 मधुमेह 🍇 :
इसके नियमित सेवन से आपका बढा हुआ ग्लूकोज लेवल सामान्य भी हो सकता है।

➡ मासिक धर्म 👸 गड़बड़ी :
जिन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होती है या फिर अनियमित माहवारी होती है, उनके लिये यह लाभकारी है। इसमें मौजूद लौह शरीर में हीमोग्लोबिन बढाता है।

➡ कब्ज :
इसमें मौजूद ढेर सारा फाइबर कब्ज में आराम दिलाता है। इससे पेट आराम से साफ हो जाता है।

➡ पेट की समस्या :
रोज इस्तेमाल करने पर कीड़ों से होने वाले इंफेक्शन और पेट की परेशानियाँ जैसे एसीडिटी आदि दूर रहतीं हैं।

➡ शुक्राणुओं 💂 की गिनती बढाए :
कुलथी में कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन और अमीना एसिड होते हैं, जो कि स्पर्म बढ़ाने के लिये योगदान करते हैं। कुलथी सीमेन से गंदगी को बाहर भी निकाली है।

➡ मोटापा 🙌 कम करना :
यह शरीर की चर्बी को घटाती है और कफ जो कि मोटापे की जड़ है उसे दूर करती है। इसमें ढेर सारा प्रोटीन और फाइबर होता है, जिससे आसान से वजन कम होता है।

▶ कैसे करें प्रयोग :
कुलथी को रात भर पानी में भिगो कर रखना पड़ता है। सुबह इसे साफ पानी से धो कर कुकर में पका लें, जिससे इसकी सब्जी या सूप बना सके। अगर आप इसे स्प्राउट के रूप में खाएं तो इसकी पोषण छमता ज्यादा बढ जाएगी।

▶ किसे नहीं खाना 🚫 चाहिये :
प्रेगनेंट महिलाएं, जिन्हें वजन बढाना हो या फिर टीबी के रोगी को।

परिहार से भिस्वा मार्ग को दुरूस्त किया जाय- मोहम्मद कमरे आलम

परिहार  (सीतामढी )।परिहार से भिस्वा मार्ग को दुरूस्त किया जाय ये बातें मोहम्मद कमरे आलम ने बिहार पथ निर्माण विभाग पटना के वेब पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर किया है।परिहार से भिस्वा मार्ग की हालत दयनीय हो चुकी है जिस पर पैदल चलना भी आम लोगों को दुशवार हो गया है।
        मामूली बारिश में प्रखणड कार्यालय के सामने, हाईस्कूल के निकट, बिकाऊ चाय दुकान के सामने सड़क टापू में परिवर्तित हो जाता है कमाल तो ये है सभी पदाधिकारी, जन प्रतिनिधियों का गुजर इसी मार्ग से होता है फिर भी ध्यान नही दिया जाता है। जर्जर सड़क और सड़कों का अतिक्रमण कर लिए जाने की वजह से अक्सर दुर्घटनाएँ होती रहती हैं ।
             मालूम हो कि जर्जर सड़क और सड़कों के अतिक्रमण के कारण दुर्घटना में कई जानें जा चुकी है।ट्रक से कुचल कर हाईस्कूल के सामने एक नौजवान की मौत घटना स्थल पर ही हो गई ।अभी 19 सितम्बर 16 को परिहार चौक के दक्षिण ट्रांस्फ़ाॅरमर के निकट बस से कुचल कर छ:वर्षीय बालक की मृत्यु घटना स्थल पर ही हो गई।

मेथी दाना का कमाल और औषधीय गुण

मेथी दाना
बहुत ही चमत्कारी दवा है :-

250 ग्राम मैथीदाना
100 ग्राम अजवाईन
50 ग्राम काली जीरा

उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना(ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर कांच की शीशी या बरनी में भर लेवें ।

रात्रि को सोते समय एक चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।

चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी(कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा । चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।

‘‘फायदे’’
1. गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा ।
2. हड्डियाँ मजबूत होगी ।
3. आॅख का तेज बढ़ेगा ।
4. बालों का विकास होगा।
5. पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।
6. शरीर में खुन दौड़ने लगेगा ।
7. कफ से मुक्ति ।
8. हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी ।
9. थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।
10. स्मरण शक्ति बढ़ेगी ।
11. स्त्री का शारीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा ।
12. कान का बहरापन दूर होगा ।
13. भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।
14. खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी ।
15. शरीर की सभी खून की नलिकाएॅ शुद्ध हो जाएगी ।
16. दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा ।
17. नपुसंकता दूर होगी।
18. डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा । जिंदगी निरोग,आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्ययवर्धक बनेगी । जीवन जीने योग्य बनेगा ।

कुछ लोग कलौंजी को काली जीरी समझ रहे है जो कि गल्त है काली जीरी अलग होती है जो आपको पंसारी/करियाणा की दुकान से मिल जाएगी जिसके नाम इस तरह से है

हिन्दी कालीजीरी, करजीरा।
संस्कृत अरण्यजीरक, कटुजीरक, बृहस्पाती।
मराठी कडूकारेलें, कडूजीरें।
गुजराती कडबुंजीरू, कालीजीरी।
बंगाली बनजीरा।
अंग्रेजी पर्पल फ्लीबेन।

1757 से 1857 तक सिर्फ़ मुसलमानो ने अंग्रेज़ों से जेहाद किया था

1757 से 1857 तक सिर्फ़ मुसलमानो ने अंग्रेज़ों से जेहाद किया था
1757 से 1857 तक सिर्फ़ मुसलमानो ने अंग्रेज़ों से जेहाद किया था
1772 मे शाह अब्दुल अज़ीज़ रह० ने अंगरेज़ो के खिलाफ जेहाद का फतवा दे दिया ( हमारे देश का इतिहास 1857 की मंगल पांडे की KIRANTI को आज़ादी की पहली KIRANTI मानता है जबके शाह अब्दुल अज़ीज़ रह० 85 साल पहले आज़ादी की KRINTI की लो हिन्दुस्तानीयो के दिलों मे जला चुके थे इस जेहाद के फतवे के ज़रिए ) इस जेहाद के ज़रिए उन्होंने कहा के अंगरेज़ो को देश से निकालो और आज़ादी हासिल करो और ये मुसलमानो पर फर्ज़ हो चुका था ।
1772 के इस फतवे के बाद जितनी भी तहरीके चली वो दरासल इस फतवे का नतीजा थी * वहाबी तहरीक * तहरीके रेशमी रूमाल * जंगे आज़ादी * तहरीके तर्के मुवालात * और तहरीके बाला कोट या इस तरह की जितनी भी कोशिशें थी वो सब के सब शाह अब्दुल अज़ीज़ रह० के फतवे का नतीजा थी मुसलमानों के अन्दर एक शऊर पैदा होना शुरू हो गया के अंगरेज़ लोग फकत अपनी तिजारत ही नहीं चमकाना चाहते बल्के अपनी तहज़ीब को भी यहां पर ठूसना चाहते है इस शऊर को पैदा होने के बाद दूसरे उलमा इकराम ने भी इस हकीकत को महसूस किया के हमे अंगरेज़ो से निजात पाना ज़रुरी है ॥
वहाबी आन्दोलन
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वहाबी आंदोलन उन्नीसवी शताब्दी के चौथे दशक के सातवें दशक तक चला। इसने सुनियोजित रूप से ब्रिटिश प्रभुसत्ता को सबसे गम्भीर चुनौती दी।वैसे वहाबी आंदोलन कहने को तो धार्मिक आंदोनल था, लेकिन इस आंदोलन ने राजनीतिक स्वरुप ग्रहण कर लिया था और वह भारत से ब्रितानी शासन को उखा़डने की दिशा में अग्रसर हो चला था। वहाबी विद्रोह 1828 ई. से प्रारम्भ होकर 1888 ई. चलता रहा था। इतने लम्बे समय तक चलने वाले ‘वहाबी विद्रोह’ के प्रवर्तक रायबरेलीके ‘सैय्यद अहमद’ थे।
सैयद अहमद ने वहाबी आंदोलन का नेतृत्व किया और अपनी सहायता के लिए चार खलीफे नियुक्त किए, ताकि देशव्यापी आंदोलन चलाया जा सके। उन्होंने इस आंदोलन का केन्द्र उतर पश्चिमी कबाइली प्रदेश में सिथाना बनाया। भारत में इसका मुख्य केन्द्र पटना और इसकी शाखाएँ हैदराबाद, मद्रास, बंगाल, यू. पी. एवं बम्बई में स्थापित की गईं। इस आन्दोलन का मुख्य केन्द्र पटना शहर था। सैयद अहमदशाह के पश्चात् बिहार के मौलावी अहमदुल्ला इस संप्रदाय के नेता बने.. पटना के विलायत अली और इनायत अली इस आन्दोलन के प्रमुख नायक थे।
सैय्यद अहमद पंजाब और बंगाल में अंग्रेज़ों को अपदस्थ कर भारतीय शक्ति को पुर्नस्थापित करने के पक्षधर थे। इन्होंने अपने अनुयायियों को शस्त्र धारण करने के लिए प्रशिक्षित कर स्वयं भी सैनिक वेशभूषा धारण की। उन्होंने पेशावर पर 1830 ई. में कुछ समय के लिए अधिकार कर लिया तथा अपने नाम के सिक्के भी चलवाए। इस संगठन ने सम्पूर्ण भारत में अंग्रेज़ों के विरुद्ध भावनाओं का प्रचार-प्रसार किया।
1857 में इस आन्दोलन का नेतृत्व पीर अली ने किया था, जिन्हें कमिश्नर टेलबू ने वर्तमान एलिफिन्सटन सिनेमा के सामने एक बडे पेड़ पर लटकवाकर फांसी दिलवा दी, ताकि जनता में दहशत फैले। इनके साथ ही ग़ुलाम अब्बास, जुम्मन, उंधु, हाजीमान, रमजान, पीर बख्श, वहीद अली, ग़ुलाम अली, मुहम्मद अख्तर, असगर अली, नन्दलाल एवं छोटू यादव को भी फांसी पर लटका दिया गया
1857 ई. के सिपाही विद्रोह में ‘वहाबी’ लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से विद्रोह में न शामिल होकर अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ लोगों को भड़काने का प्रयास किया।
मौलवी अहमदुल्ला के नेतुत्व में वहाबी आंदोलन ने स्पष्ट रूप से ब्रितानी विरोधी रुख धारण कर लिया। भारत में ब्रितानियों के विरुद्ध कोई सेना ख़डी नहीं की जा सकती थी इस कारण मौलवी अहमदुल्ला ने मुजाहिदीनों की एक फौज सीमा पार इलाके के सिताना स्थान पर ख़डी की। उस सेना के लिए वे धन, जन तथा हथियार भारत से ही भेजते थे।1860 ई. के बाद अंग्रेज़ी हुकूमत इस विद्रोह को कुचलने में सफल रही।
सन् 1865 में मौलवी अहमदुल्ला को बड़ी चालाकी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया और मुकदमा चलाया गया। बहुत लालच देकर ही शासन उनके विरुद्ध गवाही देने वालों को तैयार कर सका। इस मुकदमे में सेशन अदालत ने तो मौलवी साहब को प्राणदंड की सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट मे अपील करने पर वह आजीवन कालेपानी की सजा में बदल गई। मौलवी साहब को कालेपानी की काल कोठरियों में डाल दिया गया।
अगरचे मौलवी अहमदुल्ला कालेपानी की काल कोठरी में कैद थे, लेकिन वे वहाँ से भी भारत में चलने वाले वहाबी आंदोलन को निर्देशित करते रहे। वे सरहद पार के गाँव सिताना में मुजाहिदीनों की फौज को भी निर्देश करते थे..
उन्ही के इशारे पर 1971 मे बंगाल के चीफ जस्टिस पेस्टन नामॅन की हत्या अबदुल्ला नाम के एक शख़्स ने उस समय कर दी,

जीवन का एक रहस्य

एक औरत बहुत महँगे कपड़े में अपने मनोचिकित्सक के पास जाती है और उसे कहती है कि उसे लगता है कि उसका पूरा जीवन बेकार है, उसका कोई अर्थ नहीं है। वे उसकी खुशियाँ ढूँढने में मदद करें।
मनोचिकित्सक ने एक बूढ़ी औरत को बुलाया जो वहाँ साफ़-सफाई का काम करती थी और उस अमीर औरत से बोला - "मैं मैरी से तुम्हें यह बताने के लिए कहूँगा कि कैसे उसने अपने जीवन में खुशियाँ ढूँढी। मैं चाहता हूँ कि आप उसे ध्यान से सुनें।"
तब उस बूढ़ी औरत ने अपना झाड़ू नीचे रखा, कुर्सी पर बैठ गई और बताने लगी - "मेरे पति की मलेरिया से मृत्यु हो गई और उसके 3 महीने बाद ही मेरे बेटे की भी सड़क हादसेमें मौत हो गई। मेरे पास कोई नहीं था। मेरे जीवन में कुछ नहीं बचा था। मैं सो नहीं पाती थी, खा नहीं पाती थी, मैंने मुस्कुराना बंद कर दिया था।
मैं खुद का जीवन लेने की तरकीबें सोचने लगी थी। तब एक दिन, एक छोटा बिल्ली का बच्चा मेरे पीछे लग गया जब मैं काम से घर आ रही थी। बाहर बहुत ठंड थी इसलिए मैंने उस बच्चे को अंदर आने दिया। उस बिल्ली के बच्चे के लिए थोड़े से दूध का इंतजाम किया और वह सारी प्लेट सफाचट कर गया। फिर वह मेरे पैरों से लिपट गया और चाटने लगा।
उस दिन बहुत महीनों बाद मैं मुस्कुराई । तब मैंने सोचा अगर इस बिल्ली के बच्चे की सहायता करना मुझे ख़ुशी दे सकता है, तो हो सकता है दूसरों के लिए कुछ करके मुझे और भी ख़ुशी मिले। इसलिए अगले दिन मैं अपने पड़ोसी, जो कि बीमार था, उसके लिए कुछ बिस्किट्स बना कर ले गई।
हर दिन मैं कुछ नया और कुछ ऐसा करती थी जिससे दूसरों को ख़ुशी मिले और उन्हें खुश देख कर मुझे ख़ुशी मिलती थी। आज, मैं किसी को नहीं जानती जो मुझसे बेहतर खाता-पीता हो और चैन से सोता हो। मैंने खुशियाँ ढूँढी हैं, दूसरों को ख़ुशी देकर।
यह सब सुन कर वह अमीर औरत रोने लगी। उसके पास वह सब था जो वह पैसे से खरीद सकती थी पर उसने वह चीज खो दी थी जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकती। हमारा जीवन इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम कितने खुश हैं अपितु इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी वजह से कितने लोग खुश हैं।

ख़ुशी मंजिल नहीं, यात्रा है..,वह कल नहीं, आज है..
निर्भरता नहीं, निर्णय है..,यह नहीं कि हम कौन है,
अपितु हमारे पास क्या है।

सोमवार, 19 सितंबर 2016

सुप्रीम कोर्ट ने शहाबुद्दीन को नोटिस भेजा , जमानत पर रोक नहीं

शहाबुद्दीन को हाल ही में बिहार में कई मामलों में जमानत मिली है
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की जमानत पर अंतरिम स्टे लगाने की एक याचिका को खारिज कर दिया है.
हत्या के एक मामले में पटना हाई कोर्ट ने शहाबुद्दीन को ज़मानत दी थी. इसके बाद मचे राजनीतिक घमासान के बाद बिहार सरकार ने जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो इस मामले में शहाबुद्दीन का पक्ष सुनना चाहता है. इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 26 सितंबर रखी गई है.
बिहार सरकार ने याचिका में मांग की थी कि शहाबुद्दीन की जमानत पर रोक लगे और शहाबुद्दीन के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो.
सुप्रीम कोर्ट ने राजद नेता शहाबुद्दीन को इस मामले में नोटिस जारी किया है.
11 साल से क़ैद में रह रहे शहाबुद्दीन को भागलपुर सेंट्रल जेल से 10 सितंबर को रिहा किया गया था. पटना हाई कोर्ट ने शहाबुद्दीन को राजीव रोशन हत्या मामले में ज़मानत दी थी.
पूर्व सांसद पर कई आपराधिक मामले हैं. वे सिवान से लालू प्रसाद की राष्ट्रीय जनता दल के सांसद रहे हैं. लेकिन साथ ही उनकी छवि एक बाहुबलि की रही है.
मई में दैनिक अख़बार हिंदुस्तान के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या के बाद शहाबुद्दीन को सिवान जेल से भागलपुर जेल भेज दिया गया था.

शनिवार, 17 सितंबर 2016

विद्युत विभाग के महत्व पूर्ण दूरभाष और ईमेल

Bijendra Pd Yadav
Hon'ble Minister
Contacts
Bijendra Prasad Yadav, Hon'ble Minister.
Tel: (0612)-2506224. Fax: (0612)-2506223.
Sri Pratyaya Amrit, IAS, Principal Secretary.
Tel: (0612)-2506210. Fax: 2506189.
E-Mail:
energy bihar.gov.in
Sri Vinodanand Jha, Deputy Secretary. Tel: (0612)-2506158.

Sri Pratyaya Amrit, IAS, Chairman-cum-Managing Director,
Bihar State Power Holding Company Ltd.
Tel: (0612)-2504036. Fax: 2504968.
E-Mail: chairmanbseb yahoo.co.in
Sri R. Lakshmanan, IAS, Managing Director,
Bihar State Power Generation Company Ltd.
Tel: (0612)-2504695.
E-Mail: md.bspgcl gmail.com
Sri R. Lakshmanan, IAS, Managing Director,
Bihar State Power Transmission Company Ltd. Tel: (0612)-2504442.
Fax: 2504968.
E-Mail: md.bsptcl1 gmail.com, itbsptclgmail.com
Sri Sandeep K.R.P., IAS, Managing Director,
South Bihar Power Distribution Company Ltd.
Tel: (0612)-2504045.
E-Mail: md.sbpdclgmail.com
Sri Sandeep K.R P., IAS, Managing Director,
North Bihar Power Distribution Company Ltd.
Tel: (0612)-2504044.
E-Mail: md.nbpdclgmail.com
Sri S.K.R. Pudakalkatti, IAS, Managing Director,
Bihar State Hydroelectric Power Corp. Ltd.
Tel: (0612)-2227746. Fax: (0612)-2227692.
E-Mail: bshpcltdgmail.com, mdbhpcgmail.com
Sri R. Lakshmanan, IAS, Director,
Bihar Renewable Energy Development Agency.
Tel: (0612)-2507734. Fax: (0612)-2506572.
E-Mail: bredabreda.in, directorbreda.in
Sri Shakti Kumar Negi, IAS (Retd), Chairman, Bihar Electricity Regulatory Commission.
Tel: (0612)-2504489, 2505280, 6526749. Fax: 2504488.
E-Mail: bercpatberc.co.in

E-Mail: energy.bihgmail.com 

ये तस्वीर परिहार हाईस्कूल के गेट के निकट का है इसी मार्ग से सभी पदाधिकारी गुजरते हैं


हाईस्कूल, प्रखणड संसाधन केन्द्र परिहार के सामने सड़क पर पानी का जमाव 
हाईस्कूल गाॅधी मैदान में जमा पानी 

गाँव का रिपोर्टर बन गांव की तस्वीर बदलें

परिहार  (सीतामढी )।अपने गाँव का रिपोर्टर खुद बानिए और अपने गाँव तथा आस पास का न्यूज हमे दीजिए हम इसे यहा पोस्ट करेंगे. जिससे आप के गाँव के दूर बैठे लोग आसानी से आप के गाँव में क्या चल रहा है जान पाए, आप कुछ भी न्यूज हमें दें सकते हैं जैसे की आप के गाँव मे कोई सड़क बन रहा है, या कोई त्योहार मनाया गया आप के गाँव क मुखिया और ग्राम पंचायत ठीक काम कर रहे हैं की नही, उन्हे कुछ सजेस्ट करना चाहें या फिर अपना कोई आइडिया सांझा करना चाहें आप अपना न्यूज हिन्दी  में टाइप कर के दे सकते हैं हमारी टीम इसे जरूर पोस्ट करेगी  यह एक यूनीक तरीका है अपने को गाँव को डिजिटल बनाने का देखिए आपका गाँव कही पीछे ना रह जाए अपने गाँव का न्यूज सांझा करिए और इसे डिजिटल बनाइए आप न्यूज के साथ फोटो भी भेज सकते हैं. आप का एक छोटा प्रयास आप के गाँव को बदल सकता है।
Email ID:- mdqamrealam6@gmail.com

जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने की मांग

परिहार  (सीतामढ़ी ):-ग्राम एकडंडी में लगा ट्रांसफार्मर 11/04/2016 को जल जाने से पुरा गाँव विगत कई दिनों से रात होते ही अंधकार में डूब जाता है सिरसिया पाॅवर ग्रीड से लेकर कनिय अभियंता तक शिकायत दर्ज करा दी गई है मगर अभी तक ट्रांसफार्मर नही बदला गया है गर्मी के दिनों में  विद्युत नहीं होने से उपभोक्ताओं में काफी बेचैनी है।
               एक्शन फाॅर जीरो टाॅलरेंस के संयोजक मो○सउद आलम ने प्रेस ब्यान जारी कर अविलम्ब ट्रांसफार्मर बदलने की मांगलिक कार्यपालक अभियंता विद्युत सीतामढ़ी और प्रबंध निदेशक पटना से किया है अन्यथा आंदोलन करने की बात की है।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

किसी की मौत पर ये जमे गफीर मरने वाले से सच्ची मुहब्बत और मरने वाले की इंसानी हमदर्दी को ब्यान करता है

आज भी देहात ही हवाएं गंदगी से पाक व साफ है

परिवर्तन में साहित्य का योगदान

मेहजबीं
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भारतेंदू जी, और दिव्वेदी युग की ज्यादा तर रचनाएं.. आजादी के लिए लिखी गयी.. सोई हुई जनता को जगाने के लिए लिखी गई.. और उस समय के सहित्य  से प्रभावित होकर जनता जागी भी.. और आजादी हासिल की.. ये मार्क्सवादी, समाजवादी, गांधीवादी, अस्तित्ववादी,राष्ट्रवादी विचार क्या हैं.. क्या कोई अनपढ़ और प्रोफेशनल शिक्षा प्राप्त इन विचारों को समझता है.. हमारे हिन्दी भाषा के, और अन्य भाषाओं या, बोलियों के साहितकार इन विचारों से प्रभावित हुए हैं.. और अपनी रचनाओं में इन विचारों को व्यक्त किया है। लेबर डे मनाया जाता है पहली मई को.. क्या लेबर्स की जीत में साहित्यकार शामिल नहीं हैं? मेरे ख्याल से तो हैं.. बल्कि इन साहित्यकारों के विचारों को फिल्मकारो ने अपनी फिल्मों में भी बाखूबी ब्यां किया है। देवदास, मुगले आजम, सामंती व्यवस्था के मुँह पर करारा चांटा है.. अमिताभ बच्चन की कुली, नमक हराम, पूंजीवादी व्यवस्था पर.. आखिर क्यों, डोर, लज्जा, मंडी, अर्थ, फेमिनिजम से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाती है.. रंग दे बसंती सीधा सिस्टम पर सवाल उठाती है.. क्या आजादी के बाद सिस्टम में कुछ बदलाव आया है, या सिर्फ चेहरे ही बदलें हैं... बॉलीवूड ने साहित्यिक रचनाओं पर भी फिल्में बनाई हैं... जैसे की फणीश्वर नाथ रेणु जी की कहानी 'तीसरी कसम' पर फिल्म बनी हैं.. उन्हीं के उपन्यास 'मैला आंचल' पर आधारित नाटक बना.. 'राही मासूम' रज़ा के उपन्यास 'नीम का पेड़' पर भी नाटक बना 'उमराव जान' भी उपन्यास पर ही आधारित है... थ्री इडियट्स भी उपन्यास से ही प्रभावित होकर बनाई गई है.. मन्नू भंडारी जी की कहानी 'यही सच है' पर आधारित फिल्म रजनी गंद्धा बनी.. 'आपका बंटी' उपन्यास पर भी फिल्म बनी.. कमलेश्वर जी के उपन्यास 'काली आंधी' पर फिल्म आंधी बनी ये सारी फिल्में फिल्मकारों ने इन साहित्यिक रचनाओं से प्रभावित होकर ही बनाई हैं.. बदलाव तो होता ही है.. प्रोफेशनल शिक्षा प्राप्त करने वाले सिर्फ पैसा कमाने की मशीन बनतें हैं.. और साहित्य की शिक्षा प्राप्त करने वाले भले ही कम कमाएं, लेकिन उनके विचार जरूर साफ सुथरे हो जाते हैं...
साहित्य से सुधार हुआ है इस बात को तो झुटलाया नहीं जा सकता है.. लेकिन कुछ पहलू ऐसे भी हैं जहां जितना सुधार होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ है.. मसलन सिस्टम में, बदलाव न होने के बराबर ही है.. जिन परेशानियों से परेशान होकर, और उनसे राहत पाने के लिए भारत की जनता ने, आजादी की लड़ाई लड़ी, और आजादी हासिल की, लेकिन क्या आजादी के बाद भारत की जनता को शकून मिला? राहत मिली? सिस्टम में बदलाव आया? उतना नहीं आया जितना की जनता ने सोचा था.. सिर्फ चेहरे ही तो बदले हैं.. बुनियादी सवाल तो आज भी वहीं खड़े हैं.. हम कितने आधुनिक हुए हैं? और किस रूप में हुए हैं? आज औरत भूमंडलीकरण और बाज़ार के शौषण का शिकार है, चक्रव्यूह में फंसी है, फिल्मों में, विज्ञापनों में, औरत को नंगा कर दिया है... सामंती व्यवस्था एक नए तरीके से औरत के शरीर को उपयोग में ले रही है... इसमें पूंजीवादी व्यवस्था भी जिम्मेदार है... क्या यही है आधुनिकीकरण? औरत की आजादी? औरत की इकनॉमिक्ल पावर अभी भी वहीं है... जहाँ थी औरत अभी भी कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में मध्यकालीन सोच को ढो रही है.. आधुनिकीकरण के नाम पर हम सिर्फ भौतिक सुख का ही लाभ उठा रहे हैं.. विचारों में अभी भी मध्यकालीन सोच को ढो रहे हैं... बिरादरीवाद अभी भी वहीं है.. शादी जैसे मसलों पर बिरादरीवाद में कोई खास सुधार नहीं हुआ है.. हालाक़ी इन समस्याओं पर साहित्यकार लगातार लिख रहे हैं.. सवाल उठा रहे हैं... लेकिन भारत की 80% जनसंख्या ढीट है जो अभी भी बिरादरीवाद में फंसी है.. उस जकड़ता से बाहर आना ही नहीं चाहती.. कुछ हद तक टीवी पर होने वाले नाटककार भी जिम्मेदार हैं.. जो अब साहित्य से कट गए हैं.. बुनियादी सवालों से हटकर पता नहीं कौन सी दुनिया में दर्शकों को ले जा रहे हैं.. उन नाटकों में हम कहां खड़े हैं? उन नाटकों में न कहीं स्कूल है, न कॉलेज है, न युनिवर्सिटी है, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, कुछ भी नहीं उन नाटकों में.. अगर वो नाटक अच्छे साहित्य की स्क्रिप्ट पर आधारित हो जाएं, तो शायद और अधिक सुधार हो सके.. बुनियादी ढांचे में.. ज़रा पाकिस्तानी नाटकों को देखिये.. जिंदगी चैनल पर प्रसारित होते हैं.. उन नाटकों में लड़कियाँ स्कूल, कॉलेज, युनिवर्सिटी जाने की लड़ाई लड़ती हैं.. उन नाटकों के घरों में स्टडी रूम हैं, तलाक़ जैसे मसलों पर सवाल उठाते हैं..  उन नाटकों के पात्रों की डायलॉग डिलीवरी देखिए.. वो नाटक साहित्यिक कहानीकारों, और नाटककारों की स्क्रिप्ट पर आधारित हैं.. जिंदगी गुजार है, कितनी गृह बाक़ी हैं, धूप छांव, मात, शहरे जिंदगी, दाग़, थकन, काश हमारे यहां भी स्टार पलस कलर्स जैसे चैनलों पर ऐसे नाटक प्रसारित होते जिनसे सुधार होता.. साहित्यकारों की कमी नहीं है हिन्दुस्तान में और वो लिख भी रहे हैं मगर भूमंडलीकरण पूंजीवादी व्यवस्था के नीचे दब जाते हैं हम लोगों की दृष्टि में भी कमी है सुंदरता वस्तु में नहीं दृष्टि में होती है... जब हम ही नज़रें बंद किए बैठे हैं दिलों में नफरत लिए बैठे हैं तो इसमें साहित्य और साहित्यकार का क्या दोष?

मेहज़बीं 
जगदंबा विहार, वैस्ट सागर पुर, नई दिल्ली

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