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बिहार की शिक्षा को बर्बाद करने में किस का हाथ ?

बिहार की शिक्षा को बर्बाद करने में किस का हाथ है ? इस विषय पर अवश्य चर्चा वाद-विवाद होनी चाहिए जब देश प्रदेश का शिक्षाविद बुद्धिजीवी वर्ग वाद विवाद करना छोड़ देता है तो ह्रास होना शुरू हो जाता है यही हालात आज बिहार में शिक्षा का हो गया है बुद्धिजीवियों के खामोशी ने बिहार मे शिक्षा को नित्य नये प्रयोग की सामग्री बना शिक्षा को बर्बाद किया जा रहा है।
              बिहार की 80 प्रतिशत आबादी शिक्षा के मामलों में सरकारी स्कूलों पर निर्भर करती है और सरकार का नित्य नया नया प्रयोग यहीं होता है क्योंकि मध्यम वर्गीय और गरीबों के बच्चे यहीं पढ़ते हैं ।
हाल की पोस्ट

टोला सेवक लालो सादा की मृत्यु

बेगूसराय प्रखण्ड के टोला सेवक लालो सादा की लम्बि बीमारी के बाद मृत्यु हो गयी।पैसे के अभाव में टोला सेवक की उचित चिकित्सीय उपचार नही हो सका सरकार टोला सेवक और शिक्षा स्वयं सेवी से सरकारी कर्मियों से भी अधिक कार्य लेती है मगर मुनासिब मानदेय नही देती जिस कारण ये बराबर मानसिक और आर्थिक रूप से तनाव में में रहते हैं और समय पूर्व काल के गाल में समा जाते हैं।ईश्वर मृत आत्मा को शांति और आश्रितों को धैर्य दें।

मनीगाछी दरभंगा के टोला सेवक उमेश महतो का असामयिक निधन

मनीगाछी दरभंगा के उमेश महतो का असामयिक निधन हो गया है।महतो के असामयिक निधन पर टोला सेवक के प्रदेश अध्यक्ष ब्रह्मा नन्द, सीतामढ़ी के मोहम्मद कमरे आलम और मधुबनी रहिका प्रखंड अध्यक्ष
सीताराम महतो ने  गहरा शोक संवेदना व्यक्त किया है।

30 मई को होगी प्रदेश तालिमी मरकज़ की बैठक

बिहार राज तालीमी मरकज संघ  ।आप तमाम साथी को सलाम अर्ज़ है आप लोगों को मालूम है की संघ ने अपनी ताकत के मुताबिक हमेशा काम किया है चाहे सब का साथ मिले या न मिले और हत्ता इमकान कामयाबी भी मिली है बस आप लोगों के हेल्प की आवासेयाक्ता है है आप के खुद के लिये  आगामी कार्यकरम को देखते हुए संघ ने एक बैठक करने का निर्णय लिया है इस में सभी जिला के prisedent और परदेश कमिटी के सभी मेंबर मौजूद रहेंगें इस बैठक में आप सभी लोग सामिल हो कर अपनी जिम्मेदारी को निभाए यह बैठक । मोतिहारी के बेतिया में होगी होटल सिम्रेखा में आप सभी साथी को 29/04/2017 को पहुंचना है उस के अगले दिन यानि 30/04/2017 को सुबह से बैठक का दौर चलेगा वहां संघ के दुआरा रहने खाने का इन्तिजाम जिला कमिटी करेगी एजेंडा 1 संघ का पंजीयन 2 अगले माह हरताल या धरना का प्रोग्राम 3 संघ की मजबूती 4 सभी जिला का समस्या 5 समायोजन 6 पटना में अधिवेसन की तिथि etc आप सब से निवेदन है इस बैठक में जरुर आए और एक मजबूत कदम उठाने में आप सह्युग करें किसी भी तरह की जानकारी के लए कॉल/9534364390तारिक अनवर/9931495786अहमद राजा /8969861414/वकील अहमद

नो कॉमेंट/नो कॉमेंट/नो कॉमेंट -

हमारे तालिमी मरकज़ के साथी आपस में ही उलझ कर अपनी तवानाई बर्बाद कर रहे हैं।रियासती तालिमी कमिटी पर कॉमेंट करना बन्द करें और मुस्तक़बिल के लाहे अमल पर ग़ौर व फ़िक्र करना शुरू करें।मौजूदा रियासती कमिटी का वजूद बेगूसराय सम्मलेन में अमल में आया है जो बहुत ही अच्छी कोशिशों का नतीजा है लिहाज़ा कोई कॉमेंट नही होनी चाहिए।
एक बात और वाज़ेह कर देना चाहता हूँ कि तालिमी मरकज़ के साथी या वर्किंग कमिटी के ओहदेदारन टोला सेवक संघ के पदाधिकारियों पर अंगुश्त नुमाई करने से परहेज़ करें और संजीदगी की निशानी पेश करें।
मेरी बातों से यह यह नतीजा निकलने की कोशिश न की जाये कि मैं किसी का समर्थन या विरोध कर रहा हूँ।
" मुत्तहिद हो तो बदल डालों नज़ामे हकुमत ।
मुंतसिर हो तो कटो मरो शोर मचाते क्यों हो ।।MD Qamre Alam Ekdandi parihar sitamarhi Bihar

इन्साफ इंडिया के बैनर तले नवादा में 28 फ़रवरी को इन्साफ मार्च का आयोजन

हार के नवादा ज़िला के अकबरपुर थाना के फरहा गाँव में 17 साल की लड़की के साथ सामुहिक ब्लातकार के बाद उसकी हत्या की कोशिश की गई थी और सर पर धारदार हथियार से हमला के बाद गला काटने का प्रयास किया गया इस तरह के घटना की पूर्णावृति न हो और पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए इन्साफ इंडिया ने 28 फ़रवरी को इन्साफ मार्च का आयोजन किया है ।

Daily chingari चिंगारी چنگاری: ब्रह्मानंद दास अध्यक्ष बिहार महादलित टोला सेवक संघ की अपील

अपनी समस्या हमें लिखें हम आप की आवाज़ बनेंगें

अपनी समस्या हमें लिखें हम आप की आवाज़ बनेंगें
आप जनों से अपील है कि अगर आप प्रताड़ित किये जा रहे हैं कोई आप पर ज़ुल्म करता है या आप की कोई समस्या है आप हमें लिखें हम आप की आवाज़ बनेंगें और इवान ए हुकूमत तक पहुंचाने की कोशिश करेंगें तो देर किस बात की लिख भेजें व्हाट्स एप्प नम्बर 9199320346 परएडमिन

26 जनवरी को यौम ए जम्हूरिया क्यों मनाया जाता है ?

गणतंत्र दिवस हर भारतवासियों के लिए बहुत मायने रखता है, जिसे हम बेहद ही उत्साह के साथ मनाते हैं। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है। 26 जनवरी 1950 को भारतीय इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भारत का संविधान, इसी दिन अस्तित्व मे आया था और भारत इस दिन पूर्ण गणतंत्र देश बना।
बेहद बड़ा है हमारा संविधान
वरिष्ठ अधिवक्ता दुर्गविजय सिंह भैये ने बताया कि संविधान निर्माण की प्रक्रिया में 2 वर्ष, 11 महिना, 18 दिन लगे थे। भारतीय संविधान के वास्तुकार डॉ.भीमराव अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने विश्व के अनेक संविधानों के अच्छे लक्षणों को अपने संविधान में आत्मसात करने का प्रयास किया है। इस दिन भारत एक सम्पूर्ण गणतांत्रिक देश बन गया था। देश को गौरवशाली गणतंत्र राष्ट्र बनाने में जिन देशभक्तों ने अपना बलिदान दिया उन्हें 26 जनवरी के दिन याद किया जाता और उन्हें श्रद्धाजंलि दी जाती है।
कुछ महत्वपूर्ण जानकारी
अधिवक्ता दुर्गविजय सिंह भैये ने संविधान से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य बताये।
1- 26 जनवरी 1950 को 10.18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया।

ऐ बादल बता तेरा मज़हब कौन सा है - गुलज़ार

मस्जिद पे गिरता है
मंदिर पे भी बरसता है..
ए बादल बता तेरा मजहब कौनसा है........।।इमाम की तू प्यास बुझाए
पुजारी की भी तृष्णा मिटाए..
ए पानी बता तेरा मजहब कोन सा है.... ।।मज़ारो की शान बढाता है
मुर्तीयों को भी सजाता है..
ए फूल बता तेरा मजहब कौनसा है........।।सारे जहाँ को रोशन करता है
सृष्टी को उजाला देता है..
ए सुरज बता तेरा मजहब कौनसा है.........।।मुस्लिम तूझ पे कब्र बनाता है
हिंदू आखिर तूझ में ही विलीन होता है..
ए मिट्टी बता तेरा मजहब कौनसा है......।।ऐ दोस्त मजहब से दूर हटकर, इंसान बनो
क्योंकि इंसानियत का कोई मजहब नहीं होता.।।

गुलज़ार

इस्लाम में औरत का मक़ाम

जब बेटी पैदा होती है तो बाप के लिए जन्नत का दरवाज़ा खुलवाती है।जब बीबी बनती है तो अपने शौहर का आधा दीन मुकम्मल करवाती है।और जब माँ के दर्जे पर फ़ाइज़ होती है तो जन्नत उसके क़दमों तले रख दी जाती है।
     इस्लाम में औरतों के मक़ाम और शिक्षा के प्रसार में महिलाएं इस्लाम के भूमिका का अंदाज़ा इस से लगाया जा सकता है कि दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी 859 में मुराक्स के शहर वावोस में जामिया alqaraweyen में स्थापित की गई थी उसकी फाउंडर और हेड एक मुस्लिम महिला फातिमा अल फहरी थी जिस के पिता मोहम्मद अल फहरी एक दौलत मन्द ताजिर थे।इस लिए ये ख्याल बिल्कुल ग़लत है कि इस्लाम औरतों के शिक्षा का विरोधी है।

तालिमी मरकज और उत्थान केन्द्र के स्वयं सेवी को शिक्षक के पद पर समायोजित किया जाए - मो○कमरे आलम

मोहम्मद क़मरे आलम ने शिक्षा मंत्री ,प्रधान सचिव शिक्षा विभाग बिहार पटना को ईमेल संदेश भेज कर तालिमी मरकज और उत्थान केंद्र के स्वयं सेवी को शिक्षक के रूप में समायोजित करने की माँग के साथ निम्नांकित माँगें भेजी है:- 1. मानदेय नही नियत वेतन कम से कम 18000/रुपये।
2.विभाग सभी नियुक्त टोला सेवक/शिक्षा स्वयं सेवी को शानाख्ति कार्ड जारी करे।
3.सभी सरकारी छुट्टी के अलावा आकस्मिक अवकास, चिकित्सा अवकाश, विशेषा अवकाश,मेटरनिटी लीव अधिघोषित किया जाए
4.भविष्यनिधि का लाभ लागू करने के साथ 10 लाख रुपये का जीवन बीमा करवाया जाए
5.प्रत्येक सेंटर पर TLM, TLE की राशि बच्चों और प्रशिक्षु महिला के लिए अलग-अलग उपलब्ध कराई जाए।
5.सेवा शर्त, नियमावली का निर्धारण किया जाए ।
6.सेवा पुस्तिका का निर्धारण किया जाए ।
7.मृत्यु उपरांत आश्रितों को अनुकम्पा का लाभ दिया जाए ।
8.जन शिक्षा निदेशालय द्वारा छोड़ दिए गए सभी पूर्व तालिमी मरकज शिक्षा स्वयं सेबी और टोला सेवक को अक्षर आॅचल योजना से जोड़ा जाए ।
9.बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में Pre-Primary Education प्रारंभ कर शिक्षा स्वयं सेवी और टोला सेवक को शिक्षक के रूप में समा…

पैसे की कमी, इलाज के अभाव में टोला सेवक की अकाल मृत्यु

संजय सुमन रा0 उ0 म0 विद्यालय जनदाहा प्रखंड शिवाजीनगर जिला समस्तीपुर मे कार्यरत टोला सेवक का आज पैसे के अभाव मे ईलाज के कारण  निधन हो गया है।जिला संघ के द्वारा उनके आत्मा के शांति के लिए 2 मिनट का मौन धारण रखा और तत्काल 11000 रूपये  उनके परिजन को देने का निर्णय लिया गया है ।जिलाध्यक्ष अनिल कुमार महतो समस्तीपुर ने संजय की अकाल मृत्यु पर गहरी संवेदना व्यक्त किया है। मालूम हो कि टोला सेवक और शिक्षा स्वयं सेवी का जुलाई2016से ही मानदेय लम्बित है इतना ही नहीं जनवरी 2016 से नियोजित टोला सेवक और शिक्षक स्वयं सेवक को अभी तक मानदेय का भुगतान किया ही नहीं गया है।

तालीमी मरकज़ के शिक्षा स्वयं सेवक को सवैतनिक दो वर्षीय प्रशिक्षण दिया जाए-मोहम्मद कमरे आलम

1.शिक्षा स्वयं सेवी को मानदेय नही नियत वेतन कम से कम@18000/ रुपया दिया जाए और साथ ही समय पर देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।2.शिक्षको  की तरह वर्ष में 16 आकस्मिक अवकाश ,चिकित्सा अवकाश और महिला शिक्षा स्वयं सेवी को मातृत्व अवकाश और पुरुष को पितृत्तो अवकाश की सुविधा प्रदान की जाय।3. सरकार टोला सेवक एंव तालिमी मरकज़ के लिए सेवा शर्त एवं नियमावली तैयार करें ,एंव सेवा पुस्तिका का संधारण किया जाय ।4. नियोजित शिक्षकों की तरह सवैतनीक शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान से दो वर्षीय प्रशिक्षण दिलाया जाय।5.उत्थान केंद्र और तालीमी मरकज़ को उस वक्त तक विद्यालय में ही संचालित किया जाए जब तक इन केंद्रों को विद्यालयों के रूप में स्थापित नहीं कर दिया जाता है क्योंकि किसी के दरवाज़े पर बीना संसाधन के संचालित किया जाना मुमकिन नहीं है ।

मुस्तकीम सिद्दीकी का पत्र रवीश कुमार(एन डी टीवी) के नाम

प्रिय रविश जी |( यह हम जैसे आम आदमी का आक्रोश है , हमारे इस आक्रोश और क्रोध को न तो मीडिया दबा सकती है और न ही प्रशासन , सर मिन्हाज़ अंसारी की क्रूर हत्या एक ज्वाला बन कर उठ रही है , ऐसा ज्वाला जो देश में एक बदलाव ला सकती है , जो देश में एक क्रांती पैदा कर सकती ,जो देश में हलचल पैदा कर सकती है | सर हम आपको आपका  पक्षपात बता रहे हैं , सर हम आपको आपकी हिंदुत्व एजेंडा को उजागर कर रहे हैं , सर हम आपका मुस्लिम विरोधी चरित्र उजागर कर रहे है | और यह सब इसलिए कर रहे हैं के आप रोहित विमुला की हत्या को हत्या मानते हैं , गुजरात में दलितों की पिटाई को अत्याचार मानते हैं , दिल्ली की सड़कों पर बलात्कार को बलात्कार मानते हैं लेकिन जब यही घटना मुसलामानों के साथ होता है तब आप के स्क्रीन की छमता या तो घट जाती है या फिर आप अपने ध्रुव पर आ जाते हैं | )रविश सर जी कल मैंने आपके मोबाइल नंबर पर शाम लगभग 6 बजे कॉल किया था , आपने कॉल रिसीव नही की , यह सोंचकर के किसी आम आदमी का कॉल होगा या यह सोंच कर के कोई आम बात होगी , सर दोनों बातें सत्य है , मैं एक आम आदमी हूँ और बातें जो करनी थी वह भी आम थी | सर आम आदमी इसलि…

तीसरे मोर्चों को सत्ता में आने की ज़रूरत, मगर अपनी कमजोरी के कारण नही आ पाते-महज़बीं

तीसरे मोर्चों की कमियों के कारण ही तो, भारत में सिर्फ और सिर्फ कॉग्रेस - बीजेपी राज करती आई है, और करती रहेगी, भारत के तीसरे मोर्चे बहुत कमजोर, बेअक़ल, सुस्त, अहसासे कमतर, मौन व्रत रखने वाले हैं। भाग्य में विश्वास रखते हैं, कर्म में नहीं। जनमत इकट्ठा करने में विफल रहे हैं। सब होता है इनसे, तरह - तरह के आयोजन, सेमिनार, विरोध प्रदर्शन, सिर्फ विश्वविद्यालयों तक सीमित रखते हैं। अपनी आवाज़ के दायरे को बड़ा नहीं करते हैं, जनमत जबतक हासिल नहीं करते, तबतक सब बेक़ार है, और जनमत सिर्फ महानगरों, युनिवर्सिटी कॉलेज के विद्यार्थियों प्रवक्ताओं का नहीं चाहिए होता, वो तो मुट्ठी भर हैं, सत्ता में आने के लिए निम्न, मध्य, उच्च स्तरीय अवाम के जनमत की भी आवश्यकता है, जिसके लिए यूनिवर्सिटीज के सेमीनार हॉल की कुर्सीयों को छोड़कर अवाम के बीच आना होगा, सड़कों, नुक्कड़ों, गांव - गांव, शहर - शहर, छोटे - बड़े कस्बों में, आम आदमी, अनपढ़ आदमी, मज़दूर आदमी, तक अपनी आवाज़ पंहुचना है। आजादी के 65/66 सालों में भी ग़रीब, मज़दूर, मज़लूम कम्युनिस्ट, सोशलिस्ट नामों से, पार्टियों से इनके विचारों से वाकिफ नहीं हैं ।विचारों …

आवामी लोग-ज़ाती ज़िन्दगी

अज़ीज़ बरनी
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मैं खुश हूँ तो आप मेरे साथ हैं मैं ग़मज़दा हूँ तो आप मेरे साथ हैं ये निजी ख़त उनके नाम था जो मेरे अपने हैं या अपने बन सकते हैं।मेरे ज़िन्दगी के नदिबो फ़र्ज़ उनके सामने ना रखें वो मेरी ज़िंदगी के पेचों ख़म से नावाकिफ़ रहें मेरे दुःख दर्द का उन्हें इल्म ना मेरी खुशियों में शामिल नहीं फिर ये रिश्ता कैसा जो मैं इनके साथ क़ायम करने जा रहा हूँ उनका दर्द मेरा दर्द इनकी ख़ुशी मेरी ख़ुशी है।वो परेशान हों तो परेशान हैं वो ग़मज़दा हैं तो मैं अफ़सुर्दा हूँ।मेरा एक छोटा परिवार है जिस मे मैंने जन्म लिया उन्होंने फ़र्ज़ अदा किया और मैं एक नए परिवार का सरबराह बनाये ये भी मेरा छोटा परिवार है।जिसमे मेरी शरीके सफर औलादें हैं मैं कर चुका उनके लिए जो करना है और जो करना ज़रूरी है वो अभी करूँगा बेगम के लिए जिसमें मेरी पत्नी ओलादें हैं मैं कर चुका उनके लिए जो करना है और जो करना ज़रूरी है वो भी करूँगा बेगम के लिए अभी कुछ फ़र्ज़ मेरी क़ौम और मुल्क के तई, अभी कुछ साथ ऊपर जाना नही ये सिक्का वहाँ नही चलता सिर्फ आमलनामा चलता है वहाँ ये डर नही होता की आपने अपने मुतालिगीन को कितनी आराम वो आराइश की या शहाना ज़िन्दगी …